January 23, 2022

RajPrisons

RajPrisons

Tukant Shabd Kise Kahate Hain

Tukant Shabd Kise Kahate Hain: आज हम आपको इस लेख में हम बात करेंगे तुकांत शब्द के बारे में, यह हिंदी व्याकरण का महत्वपूर्ण अंग है। हिंदी व्याकरण में शुद्ध हिंदी को लिखने के लिए अनेक नियम होते हैं।

Tukant Shabd Kise Kahate Hain
tukant shabd kise kahate hain

आज के इस पोस्ट  में हम तुकांत शब्द किसे कहते हैं? Tukant Shabd Kya Hote Hain और उनके उदाहरण के बारे में विस्तृत चर्चा करेंगे जो विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं  में  महत्वपूर्ण  होते है।

तुकांत शब्द (परिभाषा और उदाहरण) | Tukant Shabd Kise Kahate Hain

तुकांत शब्द किसे कहते हैं

तुकांत शब्द वे शब्द होते हैं, जिनके अंतिम वर्ण समान होते हैं। जैसे कि चुनना – सुनना इन दोनों ही वर्ण में “ना” वर्ण समान है। अतः यह तुकांत शब्द कहलाते हैं।

तुकांत शब्दों के उदहारण क्या हैं

खाना – पीना,नाचना – गाना,रोना – धोना,बाल – खाल,उमंग – तरंग,तंग – भंग,रात – बात,हाल – माल,मिलना – जुलना ।

ऊपर दिए गए शब्द दो-दो के जोड़ो में दिए गए तथा प्रत्येक जोड़े के शब्दों के अंतिम वर्ण समान हैं. अंत यह शब्द तुकांत शब्द कहलाते हैं।

तुकांत शब्द की परिभाषा । Tukant Shabd Ki Paribhasha

दूसरे शब्दों में कहते तो जो शब्द हमें सुनने में एक समान लगते है या सुनने में एक समान लगते हैं, वे शब्द भी  तुकांत शब्द कहलाते हैं।

जैसे :- मेरा-तेरा,बात-रात, मान-जान, शौर्य-मौर्य आदि।

तुकांत शब्द का प्रयोग प्राय हिंदी साहित्य और काव्य में सुंदरता बढ़ाने के लिए किया जाता हैं। तुकांत शब्द काव्य और पध की शोभा बढ़ाते हैं। दूसरे शब्दों में यदि बात की जाए तो यह किसी पद या कविता की पंक्ति के आखिरी वर्ण की मात्रा सभी पंक्तियों में समान हो तो उसे हम तुकांत कहते हैं।

जैसे की :

प्रगतिशील स्वातन्त्र्य प्रेम की लौ जलती है ।
समता के अधिकारों की इच्छा पलती है ।।
इस समाज ने डाल दिये हैं जो भी बन्धन।
छिन्न भिन्न करने देखो ‘नारी’ चलती है ।।

tukant shabd kya hota hai

 काव्य पंक्तियों के अंतिम भाग में पायी जाने वाली वर्णों की समानता को तुकान्त कहते हैं।

कविता के शिल्प में तुकान्त का विशेष महत्व है, इसलिए काव्य-साधना के लिए तुकान्त-विधान समझना आवश्यक है। आइए हम तुकान्त को समझने का प्रयास करें ।

तुकांत शब्द का उपयोग कहा होता हैं?

इसके साथ ही फ़िल्मी गानों में भी लय, सुर और तार को बनाए रखने के लिए तुकांत शब्द का प्रयोग होता हैं. जिसके उदाहरण निचे दिए गए हैं.

निचे  दिए गए पद्य में दोनों पंक्तियों में ‘हो’ शब्द पंक्तियों के अंतिम में लगा हैं. जो पद्य की शोभा को बढ़ा रहे हैं. ‘हो’ शब्द यह तुकांत शब्द कहलाता हैं.

नया वर्ष कुछ ऐसा हो पिछले बरस न जैसा हो ।
घी में उँगली मुँह में शक्कर पास पर्स में पैसा हो । ।

निचे  दिए गए पद्य में दोनों पंक्तियों में ‘ ला  ’ शब्द पंक्तियों के अंतिम में लगा हैं. जो पद्य की शोभा को बढ़ा रहे हैं. ‘ला’ शब्द यह तुकांत शब्द कहलाता हैं.

क्या लम्बी यात्रा पर निकला पुरुष अकेला ।

बिन नारी क्या सृजित कर लिया जग का मेला ।।

तुकांत शब्दों के उदाहरण । Tukant Shabd Kise Kahate Hain ।

  • सितार – गिटार
  • विचार- विकार
  • फूल- भूल
  • धूल- शूल
  • चंदन – नंदन
  • कच्चा – पक्का
  • बच्चा- सच्चा
  • शादी- दादी
  • खादी -लादि
  • कौन – मौन
  • वानर-जानर
  • वाणी-पाणी
  • भाषा-निराषा
  • दिया-लिया
  • वंदन- चन्दन
  • माला- काला
  • साला- पाला
  • ताला- डाला
  • बाल- लाल
  • खाल- साल
  • आया- गाया
  • खाया- भाया
  • पक्की – चक्की
  • मक्की – लक्की
  • ककड़ी – मकड़ी
  • लकड़ी-पकड़ी
  • नौका – मौका
  • सागर -गागर
  • मीठी-पीठि
  • मटका- लटका
  • रानी – पानी
  • सेना -वेना
  • शोर – मोर
  • पगड़ी- रगड़ी
  • पाना- खोना
  • मिलना – खिलना
  • रंग- अंग
  • नीला – पीला
  • मेरा-तेरा
  • जान-मान
  • कचौड़ी- पकौड़ी
  • हार – मार
  • कार-तार
  • थार- लार
  • मुरारी – सुरारी
  • कुमारी-पुजारी
  • कुल – खुल
  • पूल- धुल
  • नथ- पथ
  • चल- पल
  • नल-जल
  • चुनना – सुनना
  • बुनना- गुनना
  • थल – बल
  • छल- चल
  • आम- नाम
  • खाना- पाना
  • जाल – थाल, माल, साल
  • झोली – बोली, गोली
  • संग- भंग
  • माल -साल
  • झटका-अटका
  • नानी -बानी
  • वैसा -पैसा
  • झगड़ी-तगड़ी
  • कैसा – जैसा
  • रोना-सोना
  • पीला -ढीला
  • दही-माहि
  • हिरा- मीरा
  • शिरा- खीरा
  • राजू-काजू
  • चौका- मौका
  • दाना- नाना
  • राजा- बाजा
  • ताजा -माजा
  • लेना -देना
  • माता – छाता
  • रजा -सजा
  • आम- नाम
  • काम -दाम
  • खटिया- मचिया
  • तकिया- मकिया
  • मीरा – जीरा
  • बाजू- लाजु
  • झोला- गोला
  • भोला- टोला
  • गाडी -पाडी
  • साड़ी- खाड़ी

50+ हिंदी में समान तुक वाले शब्द । tukant shabd in hindi

बात रात
किला जिला
धन वन
किला दिला
मान जान
वतन पतन
परम करम
केला झेला
भरण मरण
मन धन
भार जार
शौर्य मौर्य
जाम शाम
बम सम
चहल पहल
कड़क भड़क
ताला जाला
शिमला विमला
रहन सहन
सरल तरल
तारा पारा
गाना जाना
नगर मगर
अगर मगर
अस्त व्यस्त
मरण भरण
चरण अरण
पवन हवन
पाक नाक
सपना खपना
जेल बेल
कान जान
मान खान
कब अब
छोटू मोटू
राम आम
आन बान
जहर कहर
जाकर लाकर
आलू कालू
वहां जहां
चल पल
जगन मगन
हार भार
काज बाज
गरम चरम
मल जल
राजा भागा
हारा खारा
बाल काल
नरम चरम
आज काज
भवन पवन
तब अब
मुकाम दुकान
चटक लटक
चुटीया कुतिया
सड़क अड़क
ओत प्रोत
गीला पीला
पाना लाना
जताना बताना
जगाना भगाना
हाथ साथ
रस्म कस्म
काला पाला
बताना हटाना
तीर हीर
रात जात
पान कान
शहर लहर
भालू आलू
नीर वीर
कमर अमर
वाणी जाणी
जतन वतन
अपना जपना
अर्पण दर्पण
नहर पहर
काला भाला
मिला किला
मेला ठेला
डगर मगर
आना जाना
सरल भरल
साठ आठ
लट पट
साथी हाथी
हाव भाव
धन तन
तन मन
जब कब
शान जान
आन बान
वहम अहम
उलटी पलटी
जाला लाला
कप जप
पकड़ जकड़
छगन गगन
रीत जीत
नूर दूर
नमक दमक
नीर तीर
यहां वहां

 

  1. शब्द किसे कहते हैं
  2. पर्यायवाची शब्द  किसे कहते हैं?
  3. Tatsam Shabd And Tatbhav Shabd
  4. Anekarthi Shabd Kise Kahate Hain
तुकांत शब्द की विश्षेता

कविता के शिल्प में तुकान्त का विशेष महत्व होता है, इसलिए काव्य-साधना के लिए तुकान्त-विधान समझना बहुत ही आवश्यक है।

तुकांत की कोटियाँ-

(1) वर्जनीय तुकांत

(2) पचनीय तुकांत

(3) अनुकरणीय तुकांत

(4) ललित तुकांत

तुकांत का महत्व-

  •  तुकांत से काव्यानन्द की शोभा बढ़ जाती  है।
  • तुकांत के कारण रचना विस्मृत नहीं होती है। अगर कोई पंक्ति विस्मृत या भूले हो जाये तो तुकांत के आधार पर याद आ जाता  है।
  •  छंदमुक्त रचनाएँ भी तुकांत होने पर अधिक प्रभावशाली हो जाती हैं।
  •  तुकांत की खोज करते-करते रचनाकार के मन में नये-नये भाव, उपमान, प्रतीक, अलंकार आदि कौंधने लगते हैं जो पहले से मन में होते ही नहीं है।
  •  तुकांत से रचना की रोचकता, प्रभविष्णुता और सम्मोहकता बढ़ जाती है।

सामान्यतः मात्रिक छंदों में दो, मुक्तक में तीन, सवैया-घनाक्षरी जैसे वर्णिक छंदों में चार, गीतिका या ग़ज़ल में न्यूनतम छः, समान्तक शब्दों की आवश्यकता होती है।

गीत में अंतरों की संख्या से 1 अधिक समानतक शब्दों की न्यूनतम आवश्यकता होती है, अंतरे के भीतरी तुकांत इसके अतिरिक्त होते हैं।

किसी तुकांत रचना को रचने से पहले प्रारम्भ में ही समान्तक शब्दों की उपलब्धता पर विचार कर लेना चाहिए। पर्याप्त समान्तक शब्द उपलब्ध हों तभी उस समान्त पर रचना करने का विचार करना  चाहिए।

Tukant Shabd Kise Kahate Hain

हमारी  पोस्ट तुकांत शब्द किसे कहते हैं – Tukant Shabd Kise Kahate Hain पोस्ट को समाप्त करते हैं और आशा करते हैं आपको” Tukant Shabd, तुकांत शब्द के उदहारण के बारे में अधिकतम जानकारी हम आप तक पहुंचने की कोशिश करते  है अगर आपको”हिंदी व्याकरण” संबंधित और भी किसी प्रकार की जानकारी चाहिए तो आप हमें कमेंट करे जरूरी बता सकते हो । और अगर हमारी पोस्ट अच्छी लगे तो दोस्तों के साथ जरूर शेयर करे ।

Tukant Shabd Kise Kahate Hain

तुकांत शब्द किसे कहते हैं,Tukant Shabd Kise Kahate Hai.तुकांत शब्द,Tukant Shabd,तुकांत शब्द की परिभाषा

संदर्भ :- wikipedia.org