November 22, 2023

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राष्ट्रीय उद्यान व वन्यजीव अभयारण्य । Rashtriya Udyan Va Abhyaran

राष्ट्रीय उद्यान व वन्यजीव अभ्यारण । Rashtriya Udyan Va Abhyaran :- वन्य जीवों की सुरक्षा हेतु सर्वप्रथम लिखित कानून 300 ईसा पूर्व सम्राट् अशोक द्वारा  बनाया गया।

राष्ट्रीय उद्यान व वन्यजीव अभयारण्य

  • आधुनिक समय में वन्य जीवों की सुरक्षा हेतु कानून 1887 में वन्य जीव सुरक्षा अधिनियम बनाया गया।
  • राजस्थान में राजस्थान राज्य वन्य पशु एवं पक्षी संरक्षण अधिनियम, 23 अप्रेल 1951 को लागू हुआ।    परन्तु राजस्थान में 7 नवम्बर, 1955 को प्रथम बार राज्य के पाँच रियासती शिकारगाहों को वन्य जीवों के लिए आरक्षित क्षेत्र घोषित किया।
  • सन 1972 में भारत सरकार के वन्य जीव सरक्षण अधिनियम पारित किया।  1 सितम्बर, 1973 से राज्य में लागू किया गया। इस अधिनियम के तहत वन्य जीवों के शिकार पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया।
  • वर्तमान में राजस्थान में 3 राष्ट्रीय उद्यान, 27 वन्य जीव अभयारण्य, 33 आखेट निषिद्धक्षेत्र, 5 जन्तुआलय, 7 मृगवन, 14 कंजर्वेशन रिजर्व एवं 2 नमभूमि क्षेत्र है।
  •  इसके अनुसार वन्य जीवों के रहने के लिए तीन स्थान निर्धारित किये गये हे (1) राष्ट्रीय उद्यान (2) अभ्यारण्य (3)आखेट निषेद्ध क्षेत्र
  • राजस्थान वन्य जीवों की दृष्टि से भारत में महत्वपूर्ण माना जाता है । राजस्थान वन्य जीवों में दूसरा स्थान रखता है।
  • वन और वन्य जीव संरक्षण के सरकारी प्रयास * वनों के ह्रास व वन्य जीवों के अंधाधुंध शिकार के कारण इनकी संख्या में भारी कमी तो आई है ही, कई प्रजाति के प्राणी लुप्त हो गये है या होने के कगार पर हैं।

 राष्ट्रीय उद्यान 

Rashtriya Udyan :- इनका नियंत्रण व निर्देशन केन्द्र सरकार के पास होता है, भारत मे कुल 104 राष्ट्रीय उद्यान है राजस्थान मे 3 राष्ट्रीय उद्यान है। (1) रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान (स. माधोपुर ) ( Ranthambore National Park ) 2. केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान ( keoladeo national park )  (भरतपुर ) 3. मुकन्दरा हिल्स (दर्रा) राष्ट्रीय उद्यान (mukundra hills national park)

FAQ

Q#1 राष्ट्रीय उद्यान किसे कहते हैं

Q#2 राजस्थान में राष्ट्रीय उद्यान कितने हैं

आखेट निषेद्ध क्षेत्र

आखेट निषेद्ध क्षेत्र:– राजस्थान में कुल – 33 है, परन्तु सम्पूर्ण राजस्थान ही आखेट निषेद्ध क्षेत्र माना जाता है।

  • → सबसे अधिक आखेट निषेद्ध क्षेत्र  – जोधपुर जिले
  • → सबसे बड़ा आखेट निषेद्ध क्षेत्र सांवतसर कोटसर – चुरू, बीकानेर
  • → राजस्थान में राष्ट्रीय उद्यान व अभ्यारण्य, इन दोनों से आखेट निषेद्ध क्षेत्र की दृष्टि से ज्यादा है।
  • → संविधान के भाग 4 मे वन्य जीवों के बारे में उल्लेख किया गया है। भाग – 4   में नीति निर्देशक तत्व जो आयरलैण्ड से लिये गये है।
  • → वन्य जीवों को समवृति सूची में शामिल किया गया है।
  • →भारत में वन्य जीवों की दृष्टि से असोम के बाद राजस्थान का दूसरा स्थान है इसलिए राजस्थान को वन्य जीवों का घर कहा जाता है।

बाघ परियोजना

बाघ परियोजना :- इस परियोजना को केन्द्र सरकार ने 1973 में लागू किया था, भारत में इसके जनक कैलाश सांखला ( जोधपुर) थे। इनको Tirger of india कहा जाता है। इनको पदमश्री पुरुस्कार भी मिला हुआ है।.

  • देश में बाघों के संरक्षण के लिए 1 अप्रेल, 1973 को बाघ परियोजना प्रारम्भ की गई,
  • इस परियोजना के प्रथम चरण में 1973 को रणथम्भौर में बाघ परियोजना प्रारम्भ की, तत्पश्चात् 1978-79 में सरिस्का (अलवर) में भी बाघ परियोजना लागू की।
  • वर्तमान में देश में कुल 51 बाघ परियोजनाएँ कार्यरत है इनमें से राजस्थान में ये 3 बाघ परियोजनाएँ,
  • 1. रणथम्भौर बाघ परियोजना (सवाई माधोपुर), 2. सरिस्का बाघ परियोजना (अलवर) एवं 3. मुकुन्दरा हिल्स बाघ परियोजना राजस्थान में कार्यरत हैं।
  • भारत की प्रथम बाघ परियोजना जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान, उत्तराखण्ड में प्रारम्भ की गई।
  • राज्य का जोधपुर जन्तुआलय पक्षीशाला एवं गोडावण के प्रजनन केन्द्र के लिए प्रसिद्ध है।
  • जयपुर जन्तुआलय घड़ियाल के प्रजनन के लिए प्रसिद्ध है।

Rashtriya Udyan Va Abhyaran

 राष्ट्रीय उद्यान 


रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान । Ranthambore National Park


Ranthambore rashtriya udyan राजस्थान  में प्रथम बाघ परियोजना रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान जो सवाई माधोपुर में है ये एक रणथम्भौर बाघ परियोजना है

राजस्थान  में प्रथम बाघ परियोजना रणथम्भौर राष्ट्रीय उधान है। यह 1973 मे शुरू की गयी थी और इसे राष्ट्रीय पार्क 1980 में घोषित किया था। भारत में बाघ परियोजना -51 व राज. मे – 03 है।

  • → यह उद्यान सवाई माधोपुर में स्थित है ।
  • →राज्य सरकार ने इसे विश्व धरोहर सूची में शामिल करने के लिए यूनेस्को को प्रस्ताव भेजा है।
  • →सबसे ज्यादा बाघ परियोजना M. P में है = 8 ,  मध्ये प्रदेश को Tiger state भी कहा जाता है।
  • → रणथम्भौर को भारतीय बाघों का घर कहा जाता है। “Land of Tiger ” के नाम से भी प्रसिद्ध है
  • → यह एक शुष्क पतझड़ी वन क्षेत्र है. जहाँ अरावली स्वयं विद्यांचल दोनों पर्वत श्रंखलाएं मिलती है।
  • → यह भारत की सबसे छोटी बाघ परियोजना है। [क्षेत्रफल के आधार पर इसका क्षेत्रफल 393 वर्ग km) लकिन राजस्थान का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उधान है
  • → इस राष्ट्रीय पार्क में त्रिनेत्र गणेश जी का मंदिर है।
  • → इसमें रणथम्भौर दुर्ग स्थित है।
  • →इस उद्यान मे जोगी महल है जो बाघों को देखने का प्रसिद्ध स्थान है।
  • →हाल ही में यहाँ से दो बाघो को सरिस्का अभयारण्य मे भेजा गया। सम्भवत यह विश्व की पहली घटना है।
  • →यहाँ एक प्रसिद्ध बाधिन जिसका नाम मछली है। इसको हाल ही में लाइव टाईम एचीवमेंट पुररुस्कार दिया गया है।
  • →उद्यान में पदम तालाब, मलिक तालाब, राजबाग, गिलाई सागर, मानसरोवर एवं लाहपुर नामक छः झीलें (तालाब) स्थित हैं। यहाँ पर विश्व बैंक की सहायता से वर्ष 1996-97 में इण्डिया ईको डवलपमेन्ट प्रोजेक्ट प्रारम्भ किया गया।
  • →यहाँ पर्यटकों के दबाव को कम करने के लिए टाइगर सफारी पार्क बनाया जायेगा।

रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान से आने वाले प्रश्‍न

Q#1 रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान किस जीव के संरक्षण के लिए है ?

Ans:- बाघो के लिए


केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान । Keoladeo National Park


केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान Kevladev Rashtriya Udyan:- केवलादेव घना पक्षी विहार (राष्ट्रीय उद्यान ) यह उद्यान नेशनल हाईवे-11 पर भरतपुर के निकट 28.73 (लगभग 29) वर्ग किमी. क्षेत्र में विस्तृत है। ये राजस्थान का सबसे छोटा राष्ट्रीय उधान है । यहाँ भगवान शिव (कैलाश) का प्राचीन मंदिर होने से इसका नाम केवलादेव है।

  • यह उद्यान भरतपुर  में स्थित है ।
  • यह उधान रामसर (ईरान) साईट में शामिल किया गया है।
  • केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना 1956 में की गई, जिसे 27 अगस्त, 1981 को राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा दिया गया। 1981 में विश्व के वैज्ञानिक ईरान में इक्कटा हुए थे, यहाँ इसका नाम वे  ‘ दलदली भूमि’ का चयन किया जाता है।
  • वर्ष 2004 में  राजस्थान से रामसर साईट में केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान और सांभर झील को भी शामिल किया हे
  • यह एशिया की सबसे बड़ी पक्षी प्रजनन स्थली है। केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान पक्षियों का स्वर्ग के नाम से प्रसिद्ध है
  • आस्ट्रिया की सहायता से यहाँ पर ‘पक्षी व नमभूमि चेतना केन्द्र’ स्थापित किया गया है। यहाँ पर लगभग 390 प्रकार के पक्षी मिलते हैं।
  • यह उद्यान साईबेरियन सारस (क्रेन) के आगमन के लिए प्रसिद्ध है जो शीतकाल में आते हैं।
  • शीतकाल में यहाँ और भी पक्षी आते है जैसे :-  गीज, व्हाईट स्टार्क, बीजंस, मैलाड, मेडवल, शावर्ल्स, टील्स, पीपीटस एवं लैपवीर नामक विदेशी पक्षी साइबेरिया एवं उत्तरी यूरोप से भी आते हैं।
  • यहाँ पर मुख्यतः धोक, कदम्ब, बैर, खजूर और बबूल के पेड़ पाए जाते हैं।
  • यह सर्विम त्रिकोण पर स्थित है [ golden Tringle)
  • इस उद्यान मे स्थित पायथन पांइट से अजगर देखे जा सकते है।
  • इस उद्यान चीतल, सांभर, जरख, गीदड़, जंगली बिल्ली, सियार आदि वन्य जीव मिलते हैं।
  • 1985 में युनेस्कों ने इसको विश्व धरोहर में शामिल किया गया है
  • इस उधान मे अजान बांध भरतपुर मे पानी आता है
  • यह राष्ट्रीय उद्यान प्रसिद्ध पक्षी विशेषज्ञ डॉ. सलीम अली की कर्मस्थली

केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान ( Keoladeo National Park ) से हटकर अन्य याद रखने योग्य पॉइंट्स  :- 

  • सर्विम त्रिकोण – दिल्ली, आगरा, जयपुर, पर्यटकस्थल
  • मरु त्रिकोण – जैसलमेर, जोधपुर, बीकानेर
  • राजस्थान में सबसे ज्यादा पर्यटक जयपुर में आते है। विदेशी
  • देशी पर्यटक मांउट आबु में आते है।

केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान नोट्स Pdf

FAQ केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान से आने वाले प्रश्‍न

Q#1 केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान किसके लिए प्रसिद्ध है 

Ans:- एक विख्यात पक्षी अभयारण्य

Q#2 केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान प्रसिद्ध है 

Ans:-   पक्षी विहार 

Q#3 केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में कौन सी नदी बहती है   

Ans:-   गंभीर, बाणगंगा नदी

Q#4 केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान का नामकरण 

Ans:- केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान का नाम शिव मंदिर के नाम पर रखा गया है

Q#5 केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान किस नदी के किनारे है

Ans:- गंगा नदी

Q#6 केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान स्थापना कब हुई 

Ans:- 1956

Q# 7 केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान को रामसर साइट कब घोषित किया गया 

Ans:- 2004

Q#8 केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान कहां है

Ans:- भरतपुर

Q#9 केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान किस राज्य में है 

Ans:- राजस्थान

Q#10 केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान कहाँ है

Ans:- भरतपुर

Q#11 केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान कहां पर स्थित है

Ans:- भरतपुर

Q#12 केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान किस जिले में स्थित है 

Ans:भरतपुर

Q#13 केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान का नामकरण किसके नाम पर किया गया  ?

Ans:- केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान का नाम शिव मंदिर के नाम पर रखा गया है

Q#14 केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान कहां स्थित है

Ans:- भरतपुर

Q#15 केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान कब बना

Ans:- 27 अगस्त, 1981 को राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा दिया गया

Q#16 kevladev rashtriy udyan mein kaun si nadiya baithe hain

Ans:-   गंभीर, बाणगंगा नदी

Q#17 केवलादेव को रामसर साइट कब घोषित किया गया

Q#18 भरतपुर पक्षी अभयारण्य कहाँ है


मुकन्दरा हिल्स राष्ट्रीय उद्यान । Mukundra hills national park


मुकन्दरा हिल्स (दर्रा) राष्ट्रीय उद्यान (कोटा, चित्तौड़गढ़) इस अभयारण्य की स्थापना 1955 ई. में कोटा एवं चित्तौड़गढ़ जिलों के 199.55 वर्ग किमी. क्षेत्र में की गई। मुकन्दरा हिल्स अभयारण्य को राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा 9 जनवरी, 2012 को मिला।हाड़ौती के प्रकृति प्रेमी शासक मुकंद सिंह के नाम पर दर्रा से बदलकर मुकन्दरा हिल्स नाम रखा था। दर्रा अभयारण्य को वर्तमान मे इसको मुकुन्दरा हिल्स राष्ट्रीय उद्यान के नाम से जान जाता है।

  • यहाँ पर गागरोन का किला स्थित है।
  • ये राजस्थान का नवीनतम राष्ट्रीय उद्यान है ।
  • यही पर रावत महल ( रावंठा महल ) व अंवली मीणी ( अबला मीणी )का महल स्थित है।
  • इस अभयारण्य, , बाण्डोली का शिव मन्दिर,   भीम चौरी एवं मंदिरगढ़ के अवशेष स्थित हैं।
  •  मुकुन्दरा हिल्स राष्ट्रीय उद्यान कोटा, चित्तौड़गढ़ , झालावाड़  में स्थित है ।
  •  मुकुन्दरा हिल्स राष्ट्रीय उद्यान गागरोनी तोतों ( हीरामनी) के लिए प्रसिद्ध: – गागरोनी तोते को टुईया तोता भी कहते हैं, जो मानव की बोली की हूबहू नकल करता है। इतिहासकारों ने इसे हीरामन तोता तथा ‘हिन्दुओं का आकाश लोचन’ कहा है।
  • राज्य में सर्वाधिक जानवर इसी राष्ट्रीय उद्यान में मिलते हैं। यहाँ पर सांभर, नील गाय, चीतल, हिरण, जंगली सूअर एवं एलेक्जेन्ड्रिया पेराकीट (गागरोनी तोते) प्रमुख वन्य जीव हैं। 
  • राज्य में घड़ियाल व सारस की सबसे अधिक संख्या यही पर है।
  • वन्य जीवों को पास से देखने के लिए रामसागर, झामरा आदि स्थानों पर अवलोकन स्तम्भ बनाए गए हैं, जिन्हें रियासती ज़माने में ‘औदिया’ कहा जाता था।
  • ‎‫‬‎ राजस्थान की तीसरी बाघ परियोजना मुकन्दरा हिल्स में अप्रैल, 2013 में प्रारम्भ हो गयी है।

मुकन्दरा हिल्स राष्ट्रीय उद्यान । Mukundra hills national park से हटकर अन्य याद रखने योग्य पॉइंट्स  :- 

राजस्थान के राज्य प्रतीक

  • राज्य पक्षी : गोडावण (1981 में घोषित)
  • राज्य वृक्ष: खेजड़ी (1983 में घोषित)
  • राज्य पुष्प रोहिड़ा (1983 में घोषित)
  • mukundra hills national park kis jile mein aata hai -(कोटा, चित्तौड़गढ़)

अभयारण्य 


वन्य जीव अभयारण्य  : नियंत्रण व निर्देशन राज सरकार के द्वारा होता है।

  • → भारत मे कुल – 551 अभयारण्य, राज मे कुल – 27 अभ्यारणय
  • → भारत में सर्वाधिक अभयारण्य अण्डमान निकोबार दीप समूह – 94
  • → राज का सबसे बड़ा अभयारण्यराष्ट्रीय मरू उद्यान (जैसलमेर व बाड़मेर) (1900 वर्ग km+ 1262 वर्ग km =           कुल क्षेत्रफल = 3162 वर्ग km
  • → राज्य का सबसे छोटा अभयारण्य : सज्जनगढ़ उदयपुर

FAQ

Q#1 अभयारण्य का अर्थ

Q#2 अभयारण्य किसे कहते हैं

Q#3 अभ्यारण किसे कहते हैं

Q#4 राजस्थान में वन्य जीव अभ्यारण्य कितने हैं


राष्ट्रीय मरु उद्यान अभयारण्य 


राष्ट्रीय मरु उद्यान जैसलमेर,  बाड़मेर में स्थित है इसका  → कुल क्षेत्रफल 3162 वर्ग km । यह राजस्थान का क्षेत्रफल की दृष्टि  से सबसे बड़ा अभयारण्य है। इसे 4 अगस्त 1980 को अभयारण्य घोषित किया गया ।

  • यह अभयारण्य राज्य पक्षी गोडावन तथा राज्य पशु चिंकारा का आश्रय स्थल ( शरण स्थली )है।
  • गोडावन को ग्रेट इण्डियन बस्टर्ट शर्मिला पक्षी, सोहन या सुगन चिड़िया भी कहते है।
  • यहाँ आकल गाँव में (जैसलमेर) जीवाश्य पार्क स्थित है जिसमें 18 करोड़ वर्ष पहले के 25 वुड फोजील्स (पेड़) है। यह पेड़ समुद्री लक्षणों से युक्त है। यहाँ पहले टथिस महासागर था
  • इस अभ्यारण्य में सेवण घास सर्वाधिक है
  • सेवण घास को लिलोंण भी कहा जाता है ।
  • यहाँ पर विषैले सर्प पाये जाते है. पीवणा कोबरा रस्लस वाईपर, स्कैण्ड वाइपर आदि।

सरिस्का अभयारण्य 


 

सरिस्का अभयारण्य : – अलवर ( नवम्बर 1955 में घोषित) में स्थित है , यहाँ लगभग 200 प्रकार की प्रजातियों के पक्षी पाये जाते हैं। यह NH- 08 पर स्थित है।

  • सरिस्का हरे कबूतर, क्रासका  पठार, काकण  -बाड़ी किला, काली घाटी (काली घाटी में भारत का सबसे ज्यादा मोर घनत्व पाया जाता है।
  • धोक प लापला नामक वनस्पति प्रमुख रूप से यहीं पर पाई जाती है।
  • 1978 में इस अभयारण्य में बाघ परियोजना शरू की गयी , यह राज्य को दूसरे बाघ परियोजना है।
  • भर्तृहरि (उज्जैन का राजा की तपोस्थली) की गुफाएँ, नील कण्ड महादेव, पाण्डुपोल हनुमान जी का मन्दिर, नारायणी माता का मंदिर गढ़राजोर का जैन मंदिर, पाराशर आश्रम इस अभ्यारण के मुख्य धार्मिक स्थल है।
  • अभयारण्य क्षेत्र में सिलिसेढ़ झील स्थित है
  • टाईगर डेन होटल इस अभयारण्य में स्थित है जो RTDC द्वारा संचालित है ।
  • कनफटे नाथों का प्रमुख तीर्थ स्थल भर्तृहरि (अलवर) है
  • नाई जाति की कुलदेवी – नारायणी देवी है। (अलवर)

FAQ

Q#1 sariska abhyaran kahan sthit hai

Q#2 सरिस्का अभ्यारण कहां स्थित है

Q#3 सरिस्का अभ्यारण कहां है


सरिस्का ‘अ’ अभयारण्य 


सरिस्का ‘अ’ (अलवर ) इसकी स्थापना 26 जून, 2012 को की गई और इसका क्षेत्रफल 3.01 वर्ग किमी. में फैला हुआ है राज्य का सबसे छोटा अभयारण्य है। (इससे पूर्व ( पहले )सज्जनगढ़ अभयारण्य सबसे छोटा अभयारण्य था  )


 रामगढ़ विषधारी अभ्यारण


रामगढ़ विषधारी वन्यजीव अभयारण्य : (बुंदी) स्थापना 20 मई 1982 राजस्थान का एक मात्र ऐसा स्थान जहाँ पर बाघ – परियोजना नहीं है। फिर भी (भारत का राष्ट्रीय पशु ) बाघ स्वछन्द रूप से विचरण करता है, इसलिए इसको रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान से जोड़े जाने की सिफारिस की- गयी है?

  • रामगढ़ विषधारी अभ्यारण किस जिले में है -बुंदी
  • इसके मध्य से मेज नदी निकलती है।
  • इसमें मुख्यत: धोकड़ा वृक्ष पाये जाते है।
  • इस अभयारण्य में अजगर / पाईथन पाए जाते हैं।
  • चन्दन वृक्ष एवं हल्दी पादप इस अभयारण्य में पाए जाते हैं।
  • कनक सागर / दुगारी बाँध यहाँ स्थित है।

FAQ

Q 1 रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व कब बना ?

Ans:- 3 जुलाई 2021 को राजस्थान में चौथे बाघ अभयारण्य के तौर पर रामगढ़ विषधारी अभयारण्य को अपनी मंजूरी दी थी।

Q 2 रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के बारे में ?

Ans:-राजस्थान के बूंदी जिले में स्थित रामगढ़ विषधारी अभ्यारण को देश का 52वां टाइगर रिजर्व घोषित किया गया है। हाल ही में केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने इसकी अधिसूचना जारी की थी। यह अभयारण्य 1,071 वर्ग किमी में फैला हुआ है। यह राजस्थान का चौथा  टाइगर रिजर्व है।

Q 3 रामगढ़ विषधारी अभ्यारण किस जिले में है ?

Ans:-बुंदी

Q 4 रामगढ़ विषधारी अभ्यारण कब बनाया गया ?

Ans:-(बुंदी) स्थापना 20 मई 1982


सीता माता अभ्यारण्य Sita Mata Abhyaran


Sita Mata Abhyaran सीता माता अभयारण्य  (प्रतापगढ़, चितौड़गढ़ , उदयपुर) :-  स्थापना 2 जनवरी 1979 में हुई । इसका क्षेत्रफल 422.94 वर्ग KM.

  • भारत में हिमालय पर्वत बाद यह अभ्यारण्य सर्वाधिक वन औषधियों का भण्डार है।
  • सीताजी ने त्रेता युग में यहीं बनवास किया था।
  • यहां सिता माता का मंदिर है (जेठ  माह की अमावस्या को मेला भरता है )
  • यहाँ लव-कुश नामक क्रमश: गर्म व ठण्डे पानी के झरने है।
  • यह अभ्यारण्य चीतल की मातृभुमि कहलाता है
  • यह अभ्यारण्य उड़न गिलहरी के कारण प्रसिद्ध है
  • यहाँ पैगोलिय (पक्षी) भी पाया जाता है, जिसे स्थानीय भाषा में आडाडुला कहते है।
  • सीतामाता अभ्यारण्य में चौसीगा पाया जाता है (हिरणा जिसे स्थानीय भाषा में  भेड़ल कहते है।
  • इस अभ्यारण्य में कई नदियों का उदगम स्थल है जैसे – जाखम, सितामाता, व क्रमोई नदी आदि
  • जाखम नदी पर जाखम बांध बना हुआ है ।
  • यहाँ → सागवान, बाँस, मिश्रित वनों की देश की उतरी-पश्चिमी सीमा है।

FAQ

Q#1 सीता माता अभ्यारण कहां पर है ?

Ans:- प्रतापगढ़, चितौड़गढ़ , उदयपुर

Q#2 सीता माता अभ्यारण किस जिले में ?

Ans:-प्रतापगढ़, चितौड़गढ़ , उदयपुर

Q#3 सीता माता अभ्यारण किसके लिए प्रसिद्ध है ?

Ans:-उड़न गिलहरी

Q#4 सीता माता अभ्यारण किस जिले में है ?

Ans:-प्रतापगढ़


माउंट आबू अभयारण्य


आबु अभ्यारण्य :- माउंट आबू अभयारण्य (सिरोही) यह अभ्यारण 2008 में स्थापित हुआ इसको 2006 में इको सेंसिटिव जॉन में शामिल किया गया है ,  → जंगली मुर्गो के लिए प्रसिद्ध है।

  • गुरुशिखर (अरावली की सबसे ऊँची चोटी 1722 MTR इसी अभ्यारण्य में स्थित है।
  • उड़िया का पठार (राजस्थान का सबसे ऊँचा पठार (1060 MTR) भी इसी अभ्यारण्य मे स्थित हैं
  • इस अभ्यारण्य में एक छीपकली पाई जाती है जिसका नाम युब्ले फेरिस है यह सबसे सुन्दर छिपकली है।
  • विश्व का एक मात्र  पाया जाने वाला पादप- डिकिल पटेरा आबुएन्सिस ( वनस्पति ) यहीं पर पाया जाता है, इसी को स्थानिय भाषा में कारा कहते है।
  • राज्य का सबसे ऊँचाई वाला अभ्यारण्य माउंट आबू अभ्यारण्य है।

ताल छापर अभ्यारण्य


ताल छापर अभयारण्य : (चुरू): यह अभ्यारण 1971 में स्थापित हुआ  महाभारत काल मे यह स्थान छापर द्रोपपुर के नाम से भी जाना जाता था। गोपलपुरा, सुजानगढ़ा- जो द्रोणाचार्य का निवास स्थान था।

  • यह अभ्यारण्य काले हिरणों के लिए प्रसिद्ध है।
  • वर्षा काल मे यहाँ एक विशेष प्रकार की घास ( नर्म ) उत्पन्न होती है जिसे मोचीया साइप्रस सेन्टडस कहते हैं।
  • यहाँ एक क्षारीय वनस्पति भी है, जिसका नाम (लाना ) है, यह एक प्रकार की झाड़ी है।
  • शीतकाल में प्रतिवर्ष यहाँ प्रवासी पक्षी (कुंर्जा ) आते है।
  • इस अभ्यारण ताल छापर झील है

राष्ट्रीय चम्बल घड़ियाल अभ्यारण्य


राष्ट्रीय चम्बल अभयारण्य :- राष्ट्रीय चम्बल घड़ियाल अभ्यारण्य : – (MP. +Up+RAJ) यह तीन राज्यों में स्थित अभ्यारण्य है।

  • यह राज्य का सबसे लम्बा अभ्यारण्य है। (कोटा, बुंदी, सवाईमाधोपुर, धौलपुर )
  • इस अभ्यारण्य में एक विशेष प्रकार का स्तनपाई ( गांगेय सूस / डॉल्फिन )पाया जाता है (जो केवल उतरी भारत की नदियों में पाया जाता है)
  • चम्बल अभ्यारण्य को घड़ियालों का संसार के उपनाम से भी जाना जाता है।
  • यहाँ कछुओं की 8 प्रकार की जातियां मिलती है ।

Q1  राष्ट्रीय चम्बल वन्यजीव अभ्यारण्य किन तीन प्रदेशों में है ?

राजस्थान, मध्य प्रदेश , उतर प्रदेश ।


कुम्भलगढ़ अभयारण्य


कुम्भलगढ़ वन्य अभयारण्य :- कुम्भलगढ़ अभ्यारण्य की स्थापना 1971 में हुई । (राजसमंद , उदयपुर, पाली में) इसका क्षेत्रफल 610.53 वर्ग KM

  • यह भेड़ियों के लिए प्रसिद्ध है।
  • रणकपुर जैन मन्दिर (पाली ) इसी में
  • यहाँ जोबा वन खंड है जहाँ से भेडियो आसानी से देखे जा सकते है।
  • कुम्भलगढ़ का किला (राजसंमद) यहीं पर स्थित है
  • रणकपुर का जैन मन्दिर धरणक शाह ने बनवाया था

फुलवारी की नाल अभ्यारण


फुलवारी की नाल किस जिले में है (उदयपुर) की स्थापना 1983 में हुई । इसका क्षेत्रफल 511.41 वर्ग कम

  • इसका यह नाम रंग-बिरंगे फूलो के कारण पड़ा है।
  • इस अभ्यारण्य से मानसी वाकल व सोम नदियों का उद्गम होता है
  • यहां पर टीक वृक्ष पाये जाते हैं।
  • यह अभ्यारण्य महाराणा प्रताप की कर्म भूमि है ।

बंद बरेठा अभ्यारण 


बंद बरेठा अभयारण्य :- भरतपुर की स्थापना 1985 में हुई । इसका क्षेत्रफल 199.24 वर्ग कम

  • इस पक्षियो का घर कहा जाता है।
  • यह अभ्यारण्य जरख के लिए प्रसिद्ध है।
  • इसमें बारेठा नामक झील है।
  • केवलादेव के पक्षी इस अभयारण्य में शरण लेते है इस लिए इसे पक्षियो का घरोंदा कहा जाता है ।

सज्जन गढ़ अभ्यारण्य


सज्जन गढ़ अभ्यारण्य (उदयपुर) राजस्थान का दूसरा सबसे छोटा अभ्यारण्य है

इसमें प्रथम बायोलॉजिकल पार्क 2015 में बनाया गया है  ये 5 KM में फैला हुआ है ।


गजनरे अभ्यारण्य


 गजनरे अभयारण्य : गजनरे (बीकानेर) यह अभ्यारण्य बट बर्ड पक्षी (इम्पीरियर सेण्डगाउन) रेत के तीतर के लिए प्रसिद्ध है।


रावली टॉडगढ़ अभयारण्य


रावली टॉडगढ़ अभ्यारण : (अजमेर, पाली, राजसमंद ) 1983


जमवारामगढ़ अभ्यारण


जमवारामगढ़ अभ्यारण्य : जयपुर की स्थापना 1982 में हुई । इसका क्षेत्रफल 300 वर्ग कम

  • यहाँ धोक वन पाए जाते है यहाँ जमवाय माता का मंदिर है ।
  • यह जयपुर रियासत का शिकारगाह रहे चूका है ।

शेरगढ़ अभयारण्य


शेरगढ़ अभ्यारण्य (बारा) की स्थापना 1983 में हुई । इसका क्षेत्रफल 81.67 वर्ग KM

  • इस अभयारण्य मे शेरगढ़ किला या कोषवर्धन दुर्ग बारां स्थित है।
  • यह अभ्यारण्य सांपों की शरण स्थली के उपनाम से प्रसिद्ध है।
  • ये अभयारण्य परवन नदी के किनारे स्थित है ।

कैलादेवी अभयारण्य :- करौली


18 सवाई मानसिंह अभ्यारण्य – सवाई माधोपुर


19  जयसमंद अभ्यारण्य :- (उदयपुर) बधेंरो के लिए प्रसिद्ध है।


20 कनक सागर पक्षी अभ्यारण्य : दुगारी (बूंदी)


21 नाहर गढ़ जैविक अभ्यारण्य : नाहर गढ़ दुर्ग (जयपुर) में एक जैसे 9 महल  बने है, यह महल माघों सिंह ने अपनी पत्नियों के नाम पर बनावाये थे ।

22 भैंसरोगढ़ अभ्यारण्य :(चितौड़गढ़)  घड़ियालों के लिए प्रसिद्ध है

23 बस्सी अभ्यारण्य : (चितौड़गढ़) बस्सी कास्ट ( लकड़ी की कला के लिए प्रसिद्ध है।

24  केशर बाघ अभ्यारण्य : धौलपुर

25 जवाहर सागर अभ्यारण्यः- (कोटा और बूंदी) ● यह घड़ियालों के लिए प्रसिद्ध है।

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