January 23, 2022

RajPrisons

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मनोविज्ञान के संप्रदाय | Manovigyan Ke Sampraday

मनोविज्ञान के संप्रदाय :- आज हम आपको इस पोस्ट  के माध्यम से आपको  “मनोविज्ञान के विषय मनोविज्ञान के संप्रदाय  के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान करेंगे। हमारी यह पोस्ट  manovigyan ke sampraday  के बार में हम आपको इस से संबंधित संदेह  को दूर करने में इस पोस्ट  के जरिये मदद करेने की कोशिश करते हैं । मनोविज्ञान के संप्रदाय  |  manovigyan ke sampraday | schools of psychology in hindi

Table of Contents

manovigyan kya hai

मनोविज्ञान के संप्रदाय  (School of Psychology ): जीवो में व्यवहार से जुड़े नियमो में का अध्धयन ही मनोविज्ञान का मुख्य उद्धेश्य होता है | अलग-अलग वैज्ञानिको ने मनोविज्ञान की परिभाषाए भी अलग – अलग प्रकार से अपना अपना सयोग से  सभी  क्यों की सबका  दृष्टिकोण भी भिन्न – भिन्न होते है इन भिन्न – भिन्न दृष्टिकोण के कारण  मनोविज्ञान के विभिन्न सम्प्रदायों  (Schools of Psychology) का निर्माण हुआ था |शिक्षा मनोविज्ञान के सम्प्रदाय मनोविज्ञान के मील के पत्थर है |

मनोविज्ञान के संप्रदाय इसके इतिहास से वर्तमान की कहानी कहते है , जिससे पता चलता है की Psychology का प्रारंभ क्या था, मनोविज्ञान दर्शन शास्त्र से  आज के आधुनिक वैज्ञानिक(modern scientist) रूप में कैसे आया | तो चलिए आज  हम इसके बार में जानते है मनोविज्ञान के सम्प्रदायों (School of Psychology )शिक्षा मनोविज्ञान के सम्प्रदायों के बारे में हम आपको विस्तार से इसके बार में जानकारी प्रदान करने की कोशिश करते है |

 

मनोविज्ञान के सम्प्रदाय का अर्थ

यहाँ मनोविज्ञान सम्प्रदाय का अर्थ मनोविज्ञान के क्षेत्र में कार्य करने वाले व्यक्तियों के संगठित समुदाय के आधार पर और उनके चिन्तन और विचार करने की विधि से ही किया जाता है। मनोवैज्ञानिक वुडवर्थ का विचार के अनुसार है- हमारे लिए ‘सम्प्रदाय’ मनोवैज्ञानिकों का एक समूह है जो एक निश्चित विचार प्रणाली रखते हैं, जिससे सभी लोगों को उनके अनुसरण हेतु मार्ग-संकेत  करन किया जाता है, यदि मनोविज्ञान psychology को सदा के लिए सैद्धन्तिक एवं व्यावहारिक (theoretical and practical) मूल्य वाला एक सही व उत्पादक विज्ञान बनाना है।
इस कथन से स्पष्ट होता है कि मनोविज्ञान का सम्प्रदाय मनोविज्ञान के क्षेत्र में सिद्धन्त निरूपण(theory formulation) करने वालों का एक ऐसा संगठन है जो उसे वैज्ञानिक अध्ययन का स्वरूप प्रदान करते हैं। बीसवीं शताब्दी में मनोवैज्ञानिकों ने जो भी प्रयोग किए, उसमें उन्होंने प्राणी के व्यवहार की अलग-अलग ढंग से व्याख्या की है। इसलिए मनोविज्ञान में विभिन्न मत के सम्प्रदाय उत्पन्न हो गये। इन सम्प्रदायों ने एक ही समस्या का समाधान, अलग अलग  दृष्टिकोणों से किया।
प्रत्येक सम्प्रदाय का अलग-अलग क्षेत्र में और चिन्तन प्रणाली रही है। शिक्षा-मनोविज्ञान educational psychology में शिक्षा की समस्याओं का उपयुक्त समाधान करने के लिए इन विचारधाराओं में समन्वय की आवश्यकता नहीं  होती है।

 

शिक्षा मनोविज्ञान के सम्प्रदाय । मनोविज्ञान के संप्रदाय school of

ये सम्प्रदाय अपने विशेष क्षेत्र से सम्बन्धित योगदान करके शिक्षा प्रक्रिया में सहायक हो सकते हैं। शिक्षा-मनोविज्ञान का प्रमुख उद्देश्य बालक के सर्वागीण विकास में सहायता प्रदान करना  होता है। Psychology के सम्प्रदाय मानव मन को अपने-अपने दृष्टिकोण से समझने का प्रयत्न करते हैं। प्रत्येक सम्प्रदाय ने मानसिक समस्याओं का गहन से अध्ययन किया जाता है। कुछ सम्प्रदायों ने शिक्षा के क्षेत्र में सीखने की प्रक्रिया, बौद्धिक विकास और व्यक्तित्व-विकास आदि से सम्बन्धित विषयों का अन्वेषण  (Explore topics)  कर शिक्षा प्रक्रिया को प्रभावित किया गया  है।

मनोविज्ञान के सम्प्रदाय (Schools of Psychology )

मनोविज्ञान के कई सम्प्रदाय है , दर्शन काल से वैज्ञानिक काल तक मनोविज्ञान में कई प्रकारो  के सम्प्रदायों का निर्माण हुआ था अलग – अलग समय और अलग अलग स्थानों पर लोगो ने मनोविज्ञान के लिए विभिन विचार दिए जो आगे चल कर मनोविज्ञान के सम्प्रदायों (schools of Psychology) में परिवर्तित हुए जिसमे कुछ का वर्णन निम्न प्रकार से है |

मनोविज्ञान के संप्रदाय
मनोविज्ञान के संप्रदाय

मनोविज्ञान के सम्प्रदाय की परिभाषा

  • संरचनावाद या प्रयोगात्मक (Structuralism)
  • प्रकार्यवाद या कार्यवाद (Functionalism )
  • व्यवहारवाद((Behaviorism)
  • गेस्टाल्टमनोविज्ञान (Gestalt Psychology)
  • मनोविश्लेषण(Psychoanalysis)

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उपर्युक्त सम्प्रदायों का अध्धयन करने के मुख्य  रूप से विषय संवेदना ,उपयोगिता ,समायोजन ,गमक प्रतिक्रिया(Motor Response) , प्रत्यक्षीकरण, अचेतन प्रेरक , प्रेरणा , इच्छा , स्म्रति ,तथा व्यक्ति है |

मुख्य रूप से ये पांच  सम्प्रदाय ही मनोविज्ञान में प्रचलित है लेकिन इसके साथ कुछ और भी सम्प्रदाय है जिनका मनोविज्ञान के क्षेत्र में अध्धयन किया जाता है जो प्रकार से निम्न है |

  • प्रयोजनवाद (Purposivism )
  • साहचर्यवाद(Associationism )
  • क्षेत्रवाद(Field psychology )

 

संरचनावाद या प्रयोगात्म (Structuralism) :

मनोविज्ञान संरचनावाद सम्प्रदाय (Structuralitic School) के जनक –  विलियम वुण्ट (जर्मनी) थे ।

संरचनावाद सम्प्रदाय का प्रारम्भ  :- 1879 में किया गया

विलियम वुण्ट ने 1879 ई . मनोविज्ञान की पहली प्रयोग शाला  – लिपजिंग नमक स्थान पर जर्मनी मे  खोली थी 

विलियम वुण्ट के शिष्य – टिचनर , एडवर्ड थे 

विलियम वुण्ट, टिचनर, की इनके विचारो ने संरचनावाद मनोविज्ञान  की नीव रखी थी जिस पर चलकर संरचनावाद के अस्तित्व का निर्माण हुआ और संरचनावाद को अस्तित्ववाद तथा अन्तनिरीक्षणवाद  (introspections)  के नाम से भी जाने जाता है | संरचनावाद के अनुसार मनोविज्ञान की विषय-वस्तु चेतन अनुभूति थी |

टिचनेर ने मनोविज्ञान को अनुभव करने वाले व्यक्तियों के अनुभवों का अध्धयन का नाम विषय कहा था |   

टिचनेर ने चेतना और मन में अंतर दिया , इनके अनुसार चेतना से तात्पर्य उन सभी अनुभवों से है जो किसी व्यक्ति में किसी दिए गये क्षण (Particular Time lap) में उपस्थित होते है , जबकि मन से तात्पर्य उन सभी अनुभवों से है जो मनुष्य में जन्मजात से होते है |

विलियम वुण्ट ने चेतना के  2 प्रकार बताये है –

1) संवेदन

2) भाव

संवेदना बाहय पदार्थो की होती है और भव व्यक्ति के अन्दर ही निहित या उत्पन होता  है

जबकि टिचनेर के अनुसार चेतना के तीन भेदे होते है – 

1) संवेदन(Sensation) 

2) भाव या अनुराग (Feeling or Affectation )

 3) प्रतिमा या प्रतिबिम्ब (Image) |

टिचनेर ने अन्तनिरीक्षण को मनोविज्ञान की प्रमुख विधि माना है |

इस सिद्धांत के अनुसार मानसिक तत्वों का मनुष्य या मानव की चेतना मे महत्वपूर्ण स्थान है

  • यह सिद्धांत वैज्ञानिक पध्दति के उपयोग पर बल देता है
संरचनावाद का शिक्षा में योगदान
  • संरचनावाद मनोविज्ञान के संप्रदाय का योगदान शिक्षा तथा शिक्षा मनोविज्ञान के लिये प्रत्यक्ष ना होकर परोक्ष रूप में होता है। संरचनावाद ने सर्वप्रथम मनोविज्ञान को दर्शनशास्त्र से अलग करके इसके स्वरूप प्रयोगात्मक बनाया था ।
  • मनोविज्ञान का स्वरूप प्रयोगात्मक होने से शिक्षा की नयी पद्धति के बारे में शिक्षकों को सोचने की चेतना उत्पन  हो ही थी ।
  • शिक्षा में उन मनोविज्ञान पाठ्यक्रमों को अधिक महत्व दिया जाने लगा जिससे शिक्षार्थियों के चिन्तन, स्मरण, प्रत्यक्षण एवं ध्यान जैसी मानसिक क्रियाओं का समुचित विकास तथा उनका प्रयोगात्मक अध्ययन संभव हो सके ।

 

प्रकार्यवाद या कार्यवाद (Functionalism) :

प्रकार्यवाद /कार्यात्मकवादी सम्प्रदाय का प्रारम्भ  :- 1900 में किया गया

प्रकार्यवाद /कार्यात्मकवादी संप्रदायवादी (Functionalistic School )  के जनक – अमेरिकी वैज्ञानिक विलियम जेम्स से इसकी शुरुआत की थी 

प्रकार्यवाद के उदभव या विकास को लेकर आज भी विरोधाभास हो रहा है अभी तक कोई निश्चित तौर पर किसी न इसकी   स्थापना नहीं की लेकिन कुछ सूत्रों या अध्धयनो के आधार पर  अमेरिकी वैज्ञानिक विलियम जेम्स ने इसकी शुरुआत की थी | इनका मानना था की मनोविज्ञान का सम्बन्ध इस बात से है की चेतना क्यों और कैसे कार्य करती है, इस बात के द्वारा जेम्स ने चेतना (James Conscious)  की कार्यात्मक उपयोगिता को बल दिया | प्रकार्यवाद के अनुसार मानसिक प्रकियाए वस्तु नही है बल्कि उनमे जो गतिशीलता है वे निरंतर रूप से धटित होती रहती है |

प्रकार्यवाद की स्थापना के अनौपचारिक संस्थापक डिवी (Dewey), एंजिल (Angell) ,कार्र (Carr)  को माना जाता है 

अमेरिका में आधुनिक मनोविज्ञान के जनक विलियम जेम्स का माना जाता है ।

वुडवर्थ के अनुसार “ वह मनोविज्ञान जो यथार्थ एवं व्यवस्थित रूप से मनुष्य क्या करता है ? वह ऐसा क्यों करता है ? प्रशनो का उत्तर देने का प्रयत्न करता है उसे  प्रकार्य मनोविज्ञान कहते है ”

कार्यवाद का शिक्षा में योगदान
  • यह संप्रदाय पाठ्यक्रम की विषयवस्तु की उपयोगिता पर बल दिया जाता है
  • यह कार्य के साथ व्यवहार को व्यवस्थित करना  व अधिगम संबन्धित व्यवहारों को देखने पर बल पर ही सकता है
  • बाल मनोविज्ञान , व्यक्तिक विभिन्नता बुध्दी परीक्षण आदि उपागमों को सर्वप्रथम प्रस्तुत करने का श्रेय इस संप्रदाय को ही जाता है
  • कार्यवाद मनोविज्ञान के संप्रदाय ने अलग-अलग आयु स्तरों के बच्चों की आवश्यकतायें अलग – अलग   होती है, इस बात पर  ज्यादा बल दिया जाता है ।

 

व्यवहारवाद (Behaviorism) :

व्यवहारवाद सम्प्रदाय का प्रारम्भ  :- 1912 में किया गया

व्यवहारवाद (Behaviorism) की स्थापना जॉन ब्राण्ड्स वाटसन (अमेरका) (Watson) ने सन 1913 में की थी जान हापीकन्स विश्वविद्यालय में की गयी

इस स्कूल की स्थापना संरचनावाद तथा कार्यवाद जैसे सम्प्रदायों ने इसका  विरोध में वाटसन द्वारा की गया था ।
वह स्कूल अपने काल में विशेषकर 1920 ई0 के बाद अधिक प्रभावशाली रहा  था
जिसके कारण इसे व्यवहारवाद मनोविज्ञान में द्वितीय बल के रूप में मान्यता प्राप्त हु ही थी  ।
 वाटसन ने 1913 में साइकोलाजिकल रिव्यू में एक विशेष शीर्षक मनोविज्ञान एक व्यवहारवादी दृष्टिकोण के रूप में इसे (Psychology as the behouristic view it) के तहत प्रकाशित किया गया। यह से व्यवहारवाद का औपचारिक शुभारम्भ माना जाता है।

वाटसन का व्यवहारवाद

वाटसन के अनुसार मनोविज्ञान एक वस्तुनिष्ठ  और प्रयोगात्मक  विज्ञान  की उतपति है है | इसका सैद्धांतिक उद्धेश्य व्यवहार का अंदाजा लगना और उस पर नियंत्रण करना  होता है | व्यवहारवाद चेतना का विज्ञान ना होकर व्यवहार का विज्ञान  होता है |

  • वाटसन विचारधारा के अनुसार मनोविज्ञान का उद्देश्य मानव व्यवहार की व्याख्या  करना और नियंत्रण एव उसके संबंध मे भविष्यवाणी करना  होता है

वाटसन के व्यवहारवाद के कारण ही “ उद्दीपक अनुक्रिया (Stimulus – response ) “ की उत्पति हुई  थी | उनका कथन “मुझे एक दर्जन स्वस्थ बच्चे दे, आप जैसा चाहे मै उनको उस रूप में बना दूंगा।” यह उनके पर्यावरण की उपयोगिता को सिद्ध करने वाला कथन था । वाटसन का मानना था कि मानव व्यवहार उदीपक-अनुक्रिया सम्बन्ध को इंगित करता है।वाटसन ने दर्शन के सम्बन्ध में मन और आत्मा को मनोविज्ञान में लाना  गलत तरीका समझा था ,

इसलिए उसने अपने व्यवहारवाद में संवेदनाओ ,ज्ञानेन्द्रियो (sense organs), पेशिओ और ग्रन्थियो को सम्मलित कर वस्तुनिष्ठ रूप से निरिक्षण कर योग्य तथ्यों को स्वीकारा | वाटसन(Watson) एसी घटनाओ को या वस्तु को मानते थे जो दर्शय हो  महसूस की जा सकती हो या प्रत्यक्ष अनुभव की जा सकती हो | वृति एक पैदायशी गुण नही है , यह एक सहज क्रिया की धारा मात्र है |

वाटसन ने मनोविज्ञान की 4 प्रमुख गुण या विधिया बताई गई  है |

  • प्रेक्षण (Observation) 
  •  अनुबंधन (Condition)
  •  परिक्षण (testing)
  •  दक शाब्दिक रिपोर्ट (Verbal Report) 
व्यवहारवाद का शिक्षा में योगदान
  • व्यवहारवाद मनोविज्ञान में जो विधियां व तकनीक प्रदान कर रे  उनसे बच्चों के व्यवहार को समझने में काफी मदद हद तक  मिली जाती है ।
  • मनोविज्ञान व्यवहारवाद सीखने और प्रेरणा के क्षेत्र में व्यवहारवाद ने जो विचार प्रस्तुत किये वे अत्यन्त महत्वपूर्ण  होता है।
  • व्यवहारवादी मनोवैज्ञानिकों बच्चों के संवेगों का प्रयोगात्मक अध्ययन करके  संवेगात्मक व्यवहार को समझने का ज्ञान प्रदान किया जा सकता है ।
  • मनोविज्ञान के संप्रदाय व्यवहारवाद ने मानव व्यवहार पर वातावरण  में कारकों से  भूमिका पर विशेष जोर दिया गया । जॉन वाटसन ने पर्यावरण  करकं को बच्चों के वयक्तित्व विकास में काफी महत्वपूर्ण बताया है ।

 

गेस्टाल्ट मनोविज्ञान या  समग्राकृति या अवयववाद संप्रदाय

गेस्टाल्ट मनोविज्ञान सम्प्रदाय का प्रारम्भ  :- 1912 में किया गया था

गेस्टाल्ट मनोविज्ञान के सप्रदाय की स्थापना :- मैक्स वर्दीमर, ने  (जर्मनी) में  की थी 

|इसके अलावा मैक्स वर्दीमर के सह सहयोगी ने कोहलर (Kohler) और कोफ्का (Koffka) थी    |

गेस्टाल्ट(Gestalt) शब्द एक जर्मन शब्द है जिसका अंग्रेजी में अर्थ Configuration होता है | अगर हिन्दी में इस का अर्थ कहा जाए तो आकृति (Form), आकार (Shape) तथा समाकृति (Configuration) भी होता है |

इसके अनुसार मनोविज्ञान मानसिक क्रियाओ के संघटन का विज्ञान  भी कहा जाता है |

इनके अनुसार मानव व्यवहार भी गत्यात्मक होता है, इन्होने ये बताया की यही शक्ति व्यक्ति में व्यव्हार का कारण  भी होती है| बाल मनोविज्ञान में भी इसका बहुत महत्वपूर्ण योगदान रहा  होता है |

शिक्षा मनोवैज्ञानिकों को गेस्टाल्टवादियों के इस योगदान से स्मृति के स्वरूप को समझने में काफी  हद तक मदद मिली। इसी कारण इन लोगों ने स्मरण के स्वरूप को पुनरूत्पादक न कहकर रचनात्मक कहा जाता भी कहा  है।

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गेस्टाल्टवाद का शिक्षा में योगदान
  • गेस्टाल्टवादियों ने प्रत्यक्षण के नियमों के  प्रयोग सीखने के क्षेत्र में भी किया गया । अत: अध्यापक  चाहिये  तो कि वह शिक्षार्थी के सामने विषय सामग्री को पूर्ण रूप में प्रस्तुत करे सकते  है ।
  • मनोविज्ञान के संप्रदाय  गेस्टाल्टवादी मनोवैज्ञानिकों ने  व्यवहार की महत्ता पर बल दिया गया । प्राणी द्वारा जो भी अनुभव प्राप्त किये जाते है उस पर वह अपना समग्र रूप में बताता है ना कि उद्वीपन-अनुक्रिया संबन्धो के रूप में तोड कर।
  • व्यक्तित्व विकास में वातावरण की अग्रणी भूमिका पर बल दिया जाता है । अत: स्कूल का वातावरण ऐसा होना चाहिये बल्कि  बच्चे को  व्यक्तित्व विकास में सयहोग  प्रदान करे ।
  • शिक्षार्थियों में सूझ उत्पन्न करने पर बल दिया गया। ताकि विद्यार्थी समस्यात्मक परिस्थिति का समाधान सूझ विधि से करके सीख सके।

 

  • गेस्टाल्टवादियों सीखने के लिये यह आवश्यक है कि अधिगमार्थी को उद्धेश्यों और लक्ष्यों को जानकारी हो। अत: अध्यापक का प्रयास होना चाहिये
  • अध्यापकों को विद्यार्थियों के विचारों  और उनकी भावना को जानने व समझने का प्रयास करना चाहिये।
  • गेस्टाल्टवादियों  अपने विचारों को उन पर लादकर विद्यार्थियों के प्रत्यक्षण को प्रभावित नही करना चाहिये।
  • अध्यापक को पाठ्न सामग्री रूचि पूर्ण तथा समझ आने योग्य रूप में के समक्ष विद्यार्थियों  प्रस्तुत करना चाहिये। जो भी निर्देश दिये जाये अर्थ पूर्ण होने चाहिये।

मनोविश्लेषण(Psychoanalysis)

मनोविश्लेषण मनोविज्ञान सम्प्रदाय का प्रारम्भ  :- 1912 में किया गया था

मनोविश्लेषण मनोविज्ञान की स्थापना का श्रेय सिगमंड फ्रायड (SSigmund Freud) को जाता है

| इसमें फ्रायड का अचेतन (Unconscious) मन का सिद्धांत सबसे मुख्य करक  है  | फ्रायड ने मन को एक वैज्ञानिक रूप दे देकर समझाने का प्रयास  किया था | इसके लिए उसें मन को तीन  अवस्थाओ में बाटा गया  ज्ञात (Conscious), अर्ध ज्ञात (Pre-conscious) और अज्ञात (Unconscious)  जो आगे चल आकर इदम (id) , अहम् (Ego), पराहम (Super- Ego) में वर्गीकृत हुए  थे |

फ्रायड ने अचेतन के बारे में अध्धयन की कुछ मुख्य विधियाँ बताई थी

  • मुक्त साहचर्य विधि (free association method)
  • सम्मोहन (Hypnosis)
  • स्वप्न की व्याख्या (Dream interpretation)

Manovigyan Ke Sampraday

  • यह संप्रदाय एक प्रकार से मानसिक तर्क का संप्रदाय है
  • मनोविश्लेषण मनोविज्ञान संप्रदाय ने बाल केन्द्रित शिक्षा पर बल दिया गया  है
  • मनोविश्लेषण मनोविज्ञान के संप्रदाय मे व्यवहार निर्धारण तथा व्यक्तिक मे यौन कारक को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया है
मनोविश्लेषणवाद की विशेषतायें :-
  • स्थलाकृतिक संरचना
  • संरचनात्मक माडल
  • दुश्चिंता एवं मनोरचनाएं

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मनोविश्लेषणवाद का शिक्षा में योगदान
  1. मनोविश्लेषणवाद मनोविज्ञान के संप्रदाय में बच्चों के लिये विरेचन प्रक्रिया को महत्वपूर्ण बताया गया । बच्चों को कक्षा के अन्दर व बाहर अपने विचारो  को स्वतंत्र रूप से अभिव्यक्त करने की स्वतन्त्रता होनी चाहिए।
  2. मनोविश्लेषणवाद में  शिक्षा मनोवैज्ञानिकों को समस्यात्मक बालकों के कारणों तथा इन्हीं बच्चों को पुन: समायोजित करने में मदद  करनी होती है ।
  3. मनोविश्लेषण वाद ने शिक्षा प्रक्रिया में संवेगों में  महत्पूर्ण भूमिका पर विशेष बल दिया जाता है ।
  4. व्यक्ति के व्यक्तित्व विकास में स्वतन्त्र भावनाओं की अभिव्यक्ति का विशेष महत्व होता है। मनोविश्लेषणवाद मनोविज्ञान के संप्रदाय ने इस स्वतंत्रता पर विशेष बल डाला।
  5. बाल अवस्था  में अनुभवों का मानव व्यक्तित्व पर विशेष प्रभाव होता है। इसी कारण शिक्षा मनोवैज्ञानिकों ने बाल्यकालीन शैक्षिक व्यवस्था पर विशेष जोर  दिया
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मनोविज्ञान  की शाखाऐ

समाज मनोविज्ञान – मानव का सामाजिक परिस्थिति मे किया जाने वाले व्यवहार का अध्ययन करती है

किशोर मनोविज्ञान – किशोरावस्था मे बालक के व्यवहार और विशेषताओ का अध्ययन

प्रौढ़ मनोविज्ञान – प्रौढ़ा अवस्था मे मानव के बदले व्यवहार (यथा – सोच , नज़रिया ) का अध्ययन करना

बाल मनोविज्ञान – बालक के प्रारम्भिक विकास व व्यवहार का अध्ययन करती है

सामान्य मनोविज्ञान – सामान्य परिस्थितियो मे मानव के व्यवहार का अध्ययन

असामान्य मनोविज्ञान – व्यक्ति जब असामान्य जैसे पागल , मनोरोगी (असमान्य ) जैसा  व्यवहार करे इसका अध्ययन करती है

अब हम अंतिम शब्दों में हमारा आपसे यही निवेदन है कि इस पोस्ट को अधिक से अधिक व्यक्तियों के साथ सांझा  या शेयर करें ताकि वह भी इस पोस्ट के बार में अच्छे से   समझ सकें और अपने ज्ञान का विस्तार कर सकें  और हमारा बॉलग पोस्ट अच्छी लगे तो कमेंट करे के जरूर बताना ।

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